उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले के रायरंगपुर अनुमंडल के पास नंगड़थिला गांव में डायन के संदेह में एक दंपत्ति की गला काट कर हत्या कर दी गयी. हत्यारा अब पुलस की गिरफ्त में है.
रायरंगपुर अनुमंडल में नंगड़थिला गांव है. उस गांव में कामो हांसदा अपने परिवार के साथ रहता था. कामो हांसदा का पिता कई सालों से बीमार था. कामो ने अपने पिता का इलाज कई जगह कराया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. उसे शक था कि उसके पड़ोस में रहने वाले लक्ष्मण बेसरा तथा उसकी पत्नी डुमनी बेसरा ने उसके पिता पर जादू टोना कर दिया है. कामो कई दिनों से उस दंपत्ति को जान से मारने के फिराक में था. 20 जून की रात को कामो हांसदा लक्ष्मण के घर गया. वह लक्ष्मण को बाहर बुलाया तथा पास में ही स्थित झाड़ी में ले गया. वहां कामों हांसदा ने कुल्हाड़ी से लक्ष्मण बेसरा का सर काट कर धड़ से अगल कर दिया. उसके बाद कामो हांसदा लक्ष्मण के घर गया और उसी कुल्हाड़ी से उसकी पत्नी डुमरी बेसरा का सर काट दिया. इस नृशंस हत्या के बाद कामो हांसदा फरार हो गया. सुबह मृतक दंपत्ति का पुत्र सुंदर मोहन बेसरा ने अपने परिजन की मौत की खबर गांव वालों को दी. गांव वालों ने इस घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी. पुलिस घटनास्थल से मृतकों का शव अपने कब्जे में लिया तथा पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस के अथक प्रयास के बाद कामो हांसदा को पकड़ लिया गया. पुलिस ने उस पर मामला दर्ज कर उसे अदालत भेज दिया.
Monday, June 21, 2010
Friday, June 11, 2010
पाप धोने में जान गयी....
उड़ीसा के मयूरभंज जिले में एक पवित्र तालाब है. लोगों की मान्यता है कि उस तालाब में नहाने से सभी पाप धुल जाते हैं. यह पुराणों में दर्ज है कि इस तालाब में पांडव के भाई भीम स्नान किया करते थे. इसलिए इसे भीमकुंड कहा जाता है. इस तालाब की गहराई लगभग 100 फीट है.
तालाब में अपने पाप दोने के लिए एक महिला, तीन बच्चे समेत पांच लोगों की मौत हो गयी. पाप धोने गए पर्यटक की तालाब में डूब कर हुई मौत से उक्त पर्यटन स्थल पर कई सवाल खड़े होते हैं. उक्त तालाब में नहाने से सारे पाप धुल जाते हैं. तालाब में नहाने गए लोगों के पाप इतने ज्यादा थे कि तालाब उनके पाप को धो न सकी.
बात सिर्फ उड़ीसा के भीमकुंड की नहीं है. भारत में ऐसे कई धार्मिक स्थल है जहां ऐसी दुघर्टना अक्सर होती रहती है. कहीं मंदिर में मची भगदड़ से लोग मरते हैं तो कहीं मंदिर तक पहुंचने में लोग मारे जाते हैं. आस्था और अंधिवश्वास दो अलग चीज है. किसी चीज पर आस्था गलत नहीं है, लेकिन उस आस्था का अंधिविश्वास में तब्दील हो जाना ही गलत है. जो लोग पाप दोने गए थे क्या उन्हें पता था कि वे अपने जीवनकाल में कितने पाप किए थे. इसका कोई पैमाना नहीं है और ना ही इन बेतुकी बातों का कोई मतलब है.
तालाब में अपने पाप दोने के लिए एक महिला, तीन बच्चे समेत पांच लोगों की मौत हो गयी. पाप धोने गए पर्यटक की तालाब में डूब कर हुई मौत से उक्त पर्यटन स्थल पर कई सवाल खड़े होते हैं. उक्त तालाब में नहाने से सारे पाप धुल जाते हैं. तालाब में नहाने गए लोगों के पाप इतने ज्यादा थे कि तालाब उनके पाप को धो न सकी.
बात सिर्फ उड़ीसा के भीमकुंड की नहीं है. भारत में ऐसे कई धार्मिक स्थल है जहां ऐसी दुघर्टना अक्सर होती रहती है. कहीं मंदिर में मची भगदड़ से लोग मरते हैं तो कहीं मंदिर तक पहुंचने में लोग मारे जाते हैं. आस्था और अंधिवश्वास दो अलग चीज है. किसी चीज पर आस्था गलत नहीं है, लेकिन उस आस्था का अंधिविश्वास में तब्दील हो जाना ही गलत है. जो लोग पाप दोने गए थे क्या उन्हें पता था कि वे अपने जीवनकाल में कितने पाप किए थे. इसका कोई पैमाना नहीं है और ना ही इन बेतुकी बातों का कोई मतलब है.
Tuesday, February 9, 2010
माओवादी बन गए हैं माफिया…

माओ-त्से-तुंग ने चीन में मार्क्सवादी, लेलिनवादी विचारधारा को सैनिक रणनीति में जोड़कर जिस सिद्धांत को जन्म दिया उसे माओवादी कहा जाता है। भारत में माओवादी इसी विचारधारा पर चल रहें हैं। वे सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। झारखण्ड में माओवादी माफियावादी बन गए हैं। सरकार से जारी जल जंगल जमीन की जंग के आड़ में आम नागरिक का शोषण कर रहे हैं। हाल में ही नक्सली ने लेवी का फरमान जारी किया है। फरमान के मुताबिक बड़े- छोटे सरकारी कर्मचारियों को 20 प्रतिशत वार्षिक लेवी देना होगा।
माओ साम्यवादी थे। वे वर्ग विहीन समानता लाना चाहते थे। आज नक्सली माओवादी विचारधारा अपना कर आम नागरिक की हत्या कर कौन सी समानता लाना चाहते हैं। आम नागरिकों का शोषण कर कौन सी वर्ग समानता लाना चाहते हैं। नक्सलियों की लड़ाई सरकार के खिलाफ है तो वे आम नागरिको को परेशान क्यों कर रहे हैं। आए दिन नक्सली राज्य बंद का एलान कर देते हैं। वे शायद सरकार पर दबाव बनाने के लिए बंद करवाते हैं। लेकिन इसका खामियाजा तो आम नागिरक ही भुगतना पड़ता है। झारखण्ड गठन के लगभग 10 साल होने के हैं लेकिन इन 10 सालों में लगभग दो साल झारखण्ड बंद रहा है। जिससे राज्य विकास से दो साल पीछे चला गया है।
नक्सली हथियार के बल पर क्रांति कर रहे हैं वे क्रांति नहीं आतंक फैला रहे हैं। आजादी से पहले सरदार भगत सिंह ने भी हथियार के बल पर ही देश को आजाद कराने के लिए क्रांति किया था। शहीद भगत सिंह उस समय भारतीयों के नजर में क्रांतिकारी थे और अंग्रेंजो के नजर में आतंकवादी। आज हम भारतवर्ष में रह रहे हैं। कई कुर्बानियों के बाद हमने आजादी पाई है। आज हमारा अपना संविधान है और उसके मुताबिक देश चल रहा है। आज नक्सली जो कर रहे हैं वो क्रांति नहीं आतंक है। जल जंगल जमीन की लड़ाई के बहाने नक्सली सिर्फ आतंक फैला रहे हैं।
हाल में ही झारखण्ड में सरकार द्वारा चलाए जा रहे ग्रीन हंट का नक्सलियों ने तीन दिन बंद का अह्वान कर विरोध किया। नक्सलियों द्वारा ये बंद ना तो पहला है और ना ही आखिरी। सरकार नक्सलियों पर लगाम कसने के लिए अभियान चलाते रहेंगे और नक्सली इसका विरोध राज्य बंद कर, ट्रेन की पटरी उड़ा कर या विस्फोट कर करते रहेंगे। इस लड़ाई में फतह किसी की भी हो लेकिन मारे जा रहे हैं गरीब मजदूर जो अपनी जीविका के लिए रोज मजदूरी करते हैं।
फोटो - गूगल
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